गुफ़्तगू

Shayari शायरी



गुफ़्तगू गुस्ताखियां कुछ मुझसे मैं से हो गयी।
                         अब तलक़ अनजान थे कुछ पहचान सी हो गयी।
दुनिया को समझने में गुजार दीं सदियां।
           


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