Dil ka haal- हाल-ए-दिल

                     शायरी

हाल-ए-दिल














शोखे शैदाई की मोहब्बत में हजीज-ए,-दिल हो गया है।
वाक़िफ़े हाल मेरा यूँ कुछ खुद की महफ़िल में हो  गया है।।
साहिबे जौक कभी मेरी पहचान हुआ करती थी साहब ।
सौखिये तकदीर से हजीज दिल अब हज्जे रूहानी हो गया है।।

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